—खता और खामोशी—
खता हो कोई तो हमे माफ करना,
यू खामोश रह कर न बर्दाश्त करना।
सजा जो भी हो हंस के मंजूर है हमें,
यू गुमसुम उदासी से न खुदको बर्बाद करना।
तन्हाईया एक अजाब है, जहा से निकलना भी ख्वाब है,
तुम यू अकेले ना तड़पो, इस दर्द के हम भी हकदार हैं।
मिटा कर दूरियां थाम लो हाथ मेरा,
इस टूटते हुए दिल पर थोड़ा तो रहम करना।
-MASHAALLHA
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