शीर्षक "हाँ, मैं आज़ाद हूँ"
हाँ, मैं आज़ाद हूँ,
मुझे गुलामी पसंद नहीं।
आँखों में क्रांति है,
शब्दों में इंकलाब,
हाँ, मैं भगत सिंह का फैन हूँ।
अन्याय मुझसे देखा नहीं जाता,
ईश्वर के सामने गिड़गिड़ाना आता नहीं।
आँखों में क्रांति की लौ लिए चलता हूँ,
भीख माँगना मुझे पसंद नहीं।
अन्याय पर मेरा मुँह बंद नहीं रहता,
खून से इंकलाब लिख देता हूँ।
ईश्वर जब कुछ करता नहीं,
इसलिए खुद को नास्तिक कह देता हूँ।
मेरे कंधों पर मेरा ही हाथ है,
अन्याय देखता हूँ तो खुल कर बोल देता हूँ।
मुझे मौत का कोई डर नहीं,
डर तो बस इस बात का है—
अन्याय पर न बोलूँ तो मेरा जीवन व्यर्थ है,
इसलिए शायद, मैं कुछ नज़रों में बुरा हूँ।
-एस.टी.डी. मौर्य ✍️
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