आज मैं खुली और आजाद हूं
कविता
आज मैं किसी बंधन में नहीं हूं
आज मैं खुली और आजाद हूं
आज जो मैं फैसला कर रही हूं
वह बस मेरा अपना है
अगर इस फैसले से मुझे कभी दुख भी हुआ तो
मुझे पछतावा नहीं होगा
मैं किसी को दोष नहीं दूंगी
क्योंकि मैं आप जो कर रही हूं
वह मैं फिलहाल करना चाहती हूं
और मैं चाहती तो पीछे हट सकती थी
कोई बंदिशे नहीं है
नहीं थोपा गया कोई उद्देश्य
बस हूं मैं अपनी तन्हाई के साथ
अपनों के साथ देते हुए
अपने मन से
यह जानते हुए कि अगर तकलीफ़ हुआ तो
मैं शिकायत नहीं कर सकती
मैं किसी को दोष भी नहीं दे सकती
मैं रो भी नहीं सकती
शुभारंभ हो चुकी है मेरे दरिया दिली की
मैं हमेशा नर्म रहु
पर अपनी पहचान ना खोऊ
इस सफर में