"काश मुझे कोई ख़त लिखता"
काश मुझे भी कोई ख़त लिखता,
तन्हाई, दर्द, हाल-ए-दिल सब लिखता…
पढ़ती यादों में तन्हा जब ख़त मैं,
प्रियतम मेरा जुदाई का सबब लिखता…
गिरते जो आँसू ख़त पर मेरे,
मेरी फ़िक्र का ज़िक्र महबूब हर पल लिखता…
आँखों से बार-बार, हज़ार बार चूमती जो ख़त मैं,
महबूब मुझसे मिलने का पल लिखता…
काश मुझे भी कोई ख़त लिखता…
प्राची तंवर …….