ये कलयुग है साहब यहां ऐसा ही होता है
यहां हर चेहरे के ऊपर एक नकाब होता है
यहां या तो नारी का अपमान या तो बेकसूरों पर सवाल होता है ये कलयुग है साहब यहां सच्चों पर ही अत्याचार होता है यहाँ इमानदारी का पुतला रोता और बेईमानी का पुतला हंसता है ये कलयुग है साहब यहां हर चेहरे पर एक नकाब होता है
यहां राम को तो पूजते हैं पर रावण दिल में बसता है यहां रावण का पुतला जलाकर खुद इंसान रावण बनता है ये कलयुग है साहब यहां ऐसा ही होता है यहां हर चेहरे पर एक नकाब होता है
यहां अफसरों को पैसा देकर न्याय खरीदा जाता है यहां निर्दोषों को दोषी और दोषी को निर्दोष घोषित किया जाता है ये कलयुग है साहब यहां न्याय को भी अन्याय के सामने झुकना पड़ता है। यहां पुलिस रक्षक नहीं भक्षक बन जाती है यहां खुद का जेब भरने के लिए गरीबों को जेल की चक्की पिसवाई जाती है ये कलयुग है साहब यहाँ ऐसा ही होता है यहाँ हर जगह अन्याय और अत्याचार होता है। यहाँ अमीरों का सम्मान और गरीबों का अपमान होता है यहां या तो अमीर या तो बड़ा अफसर बन कमजोरों पर अत्याचार होता है ये कलयुग है साहब यहाँ ऐसा ही होता है यहां हर चेहरे के ऊपर एक नकाब होता है।
यहां रिश्तो का अपमान और पैसों का सम्मान होता है यहां कुछ जमीनों के लिए भाई ही भाई का गला घोटता है ये कलयुग है साहब यहां ऐसा ही होता है यहाँ ईमानदारी रोटी और लालच हंसता है। यहां मां-बाप का अपमान और दौलत का सम्मान होता है यहां मां-बाप से बढ़कर बेटों के लिए जायदात होता है यहां या तो मां-बाप को मारा या तो विद्यआश्रम में छोड़ा जाता है यहां मां-बाप को अपने सर पर बोझ समझा जाता है ये कलयुग है साहब जहां मां-बाप रोटे और जायदाद हंसता है
यहां हर जगह बेईमानी होता है यहां हर जगह करप्शन का महामारी होता है यहां बैंकों में सरकारी दफ्तर में लंबे-लंबे लाइने होता है यहाँ कुछ घूस देकर ही बैंको का सर्वर और सरकारी दफ्तरों का कलम चलता है ये कलयुग है साहब यहां बिन पैसों के कलम भी नहीं उठता है। जहां गुरुओं का अपमान और नालायकों का सम्मान होता है ये कलयुग है साहब यहां ज्ञान रोता और अज्ञान हंसता है यह कलयुग है साहब यहां ऐसा ही होता है यहां हर चेहरे पर एक नकाब होता है।