सफर लंबा डगर अंजानी
मत रूकना मुसाफिर देख रात अंधियारी।
ऊबड़-खाबड़ राहों से क्या डरना
हर सफर देता एक नया तजुर्बा।
हर राह नहीं मंजिल तक पहुंचाती
कुछ कहानियां कहां मुकम्मल हो पाती।
सफ़र लंबा है इस जिंदगी का
मंजिल पर पहुंच बिछड़ना तय है सबका।
कठिन सफर भी बन जाता आसान
गर समझने वाला हमसफ़र हो साथ।।
सफर में मंजिल ना भी मिले तो क्यों होना हताश
जीने के लिए खूबसूरत यादों का काफिला तो है साथ।
सरोज प्रजापति ✍🏻
- Saroj Prajapati