Hindi Quote in Book-Review by Vedanta Life Agyat Agyani

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अपना होना ही जीवन है

"जो हुआ, अच्छा हुआ।
जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है।
जो होगा, अच्छा होगा।"

इन वाक्यों का अर्थ यह नहीं कि हर घटना सुखद होती है, बल्कि यह है कि अस्तित्व अपने नियमों से चलता है। अस्तित्व किसी व्यक्ति की इच्छा, अहंकार या कल्पना के अनुसार नहीं चलता। जो संभव है, वही घटित होता है।
समस्या अस्तित्व में नहीं है। समस्या मनुष्य के भीतर है।
मनुष्य स्वयं को जैसा है, वैसा स्वीकार नहीं करता। वह हमेशा किसी और जैसा बनना चाहता है—अधिक पवित्र, अधिक महान, अधिक ऊँचा, अधिक विशेष। यहीं से तुलना जन्म लेती है। तुलना से ऊँच-नीच पैदा होती है, ऊँच-नीच से अहंकार और हीनता, और इन्हीं से संघर्ष, हिंसा और दुख का विस्तार होता है।
अस्तित्व किसी को ऊँचा या नीचा नहीं बनाता। वह केवल विविधता को प्रकट करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वभाव में पूर्ण है। लेकिन जब मनुष्य अपने स्वभाव को छोड़कर किसी कल्पित आदर्श के पीछे दौड़ता है, तब वह स्वयं से कट जाता है। यही वास्तविक त्रासदी है।
कर्म अपने आप में न पाप है, न पुण्य। कर्म तो केवल कर्म है। पाप और पुण्य हमारे निर्णय, मान्यताएँ और सामाजिक व्याख्याएँ हैं। जब हम कर्मों पर अपने मानसिक लेबल चढ़ा देते हैं, तब उन्हीं लेबलों के बंधन में बँध जाते हैं। बंधन कर्म नहीं बनाता; बंधन हमारी व्याख्या बनाती है।
इसलिए समस्या धार्मिक नहीं, अस्तित्वगत भी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत है। प्रश्न यह नहीं कि अस्तित्व क्या कर रहा है। प्रश्न यह है कि मैं स्वयं अपने बारे में क्या मानता हूँ। मेरा भ्रम ही मेरा बंधन है।
ज्ञान का सार बहुत छोटा है—
अस्तित्व को समझो, और स्वयं को समझो।
यदि मनुष्य अपने वास्तविक परिचय में खड़ा हो जाए—न स्वयं को छोटा माने, न बड़ा; न पवित्र बनने का अभिनय करे, न अपवित्र होने का भय रखे; केवल जैसा है वैसा स्वयं को स्वीकार कर ले—तो अधिकांश संघर्ष उसी क्षण समाप्त हो जाएँ।
जहाँ स्वीकृति है, वहाँ तुलना नहीं रहती।
जहाँ तुलना नहीं रहती, वहाँ अहंकार नहीं रहता।
जहाँ अहंकार नहीं रहता, वहाँ बंधन नहीं रहता।
और जहाँ बंधन नहीं रहता, वहीं जीवन पहली बार खिलता है।
मनुष्य को बदलने की आवश्यकता नहीं है; उसे स्वयं को देखने की आवश्यकता है। स्वयं का स्पष्ट बोध ही मुक्ति है। मुक्ति अर्थ मृत्यु नहीं स्वतंत्र जीवन खुला आकाश अन्नत संभावना है।
Independent Researcher & Philosopher
Vedanta 2.0 ©
ORCID: https://orcid.org/0009-0000-8083-0685
(इंटरनेशनल रजिस्टर्ड – विज्ञान और वेदांत का संश्लेषण)परिचय:
वेदांत 2.0 “न मार्ग, न साधना, न नियम –
केवल समझ।
जो देख लिया, वही मोक्ष;
जो समझ गया, वही साधना, तो अभी जी लिया वही ईश्वर जीवन ही ईश्वर है।"

Hindi Book-Review by Vedanta Life  Agyat Agyani : 112029619
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