बचपन गया बचपना तो अभी जिंदा है
बरसात देख मन आज भी बन जाता परिंदा है
पहले सोचते थे काश आज टीचर छुट्टी मार जाए
और आज देख बारिश सोचते हैं बच्चे कम आए
ना हम बदलें,ना स्कूल बदला और ना बदली बरसात
बदला बस्ता जिम्मेदारियां और ख्वाहिशों का आकाश।
सरोज प्रजापति ✍🏻
- Saroj Prajapati