मैं और मेरे अह्सास
शब्दों का सफ़र
दिल तक शब्दों का सफ़र तय करने में वक्त लगता हैं l
नशीली यादों का सफ़र तय करने में वक्त लगता हैं ll
मोहब्बत में दो दिलों को रिश्तों में दरार हो तब l
प्यार में वादों का सफ़र तय करने में वक्त लगता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह