कविता: भगत सिंह का सपना
एक सपना देखा था भगत सिंह ने
अपने आजाद भारत का, विकसित भारत का
जहाँ फैली हो चारों तरफ हरियाली
लहराती हों फसलें, हंसता रहे किसान
समानता हो जन-जन में,
ना रहे पीड़ित कोई
शिक्षा, अन्न हो सबके लिए
भूखा न सोए कोई
अनुशासित और कर्मठ हो
मेरे देश के युवा
सांप्रदायिक आग में न जले कोई
खूब तरक्की करे मेरा भारत
शत्रु ना हो इसका कोई
पराधीनता खत्म हो जाए
मेरे शरीर के साथ ही
स्वाधीन भारत में खुशहाली हो
देशप्रेम को जिए हर कोई
देख आज के हालात और भ्रष्टाचार
रोती होगी आत्मा उनकी
क्या यही है उनके सपनों का
आजाद भारत, विकसित भारत
जहाँ रील बनाए युवा, रहे हरदम मस्ती में
न देशप्रेम, न अनुशासन, रहे नशे में
चाहे आग लगे बस्ती में
जागो मेरे देश के युवा, साकार करो
सपना मेरे आजाद भारत का
बन जाओ तुम विश्व शक्ति
लहराओ तिरंगा आजादी का
जय हिंद जय भारत
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली
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