मैं और मेरे अह्सास
वचन
वचन निभाने का हौंसला होना चाहिए l
बात रखेंगे विस्वास को बोना चाहिए ll
आपसी रंजिशें पैदा ही ना हो उस तरह l
अपने रिश्तों को अच्छे संजोना चाहिए ll
माँ पिता जैसा प्यार कोई नहीं दे सकता l
ममता की प्यारी सी गोद में सोना चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह