Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

राजा उसके मंत्री और उसके भक्त
कविता


1
नफरत इतनी गहरी है उन्हें आम लोगों से कि
वह आम लोगों को देखना भी नहीं चाहते हैं
आम जनता अपने गरीबी भुखमरी बीमारी महंगाई से मर जाएं
उन्हें फर्क नहीं पड़ता



उन्हें डर इतना गहरा है
उन्हें पढ़े लिखे आवाम से
वह उन से बात करना भी नहीं चाहता
नहीं उनकी बातें सुनना चाहता है

बस चाहता है किसी तरह से
इन्हें दबाकर गायब कर दिया जाए
क्या मार दिया जाए
उनके लिए चुनौती खत्म हो जाएंगे
सत्ता पर बैठे रहने की


और अहंकार इतना गहरा है की
अपनी ही गलतियां मनाना नहीं चाहता
नही तो कोई जवाब दे ही है
अपने गुनाहों की



उसका सर ऊंचा है आसमान से भी ज्यादाहै
उसका सीन 56 इंच की
और उसका अहंकार देश और आराम से भी बड़ा है



इस नगरी में एक ऐसा राजा है
जो बस अपने ही मौज में रहता है
उसे अपनी प्रजा की परवाह नहीं
उसकी करनी ऐसा है
जो हमेशा आम आबाम से भगत फिरता है
छुप फिरता है


भगवान दर्शन नहीं देता
बस भगवान की चर्चा होते हैं
वो राजा खुद को सच में भगवान बताता है
अपनी आलोचना साहनी की उसकी ताकत नहीं
ना ही आबाम के सामने आकर अपनी गलतियां सुनने की हिम्मत है




कोई उसके खिलाफ बोले तो
उसे राजा की बनाई बनाई जेल में डाल दिया जाता है
स्वतंत्र होना विद्रोह है
उसे देशदोरही बताया जाता है


और आतंकवादी बताकर गायब कर दिया जाता है या मौत के घाट उतार दिया जाता है




इस नगरी की राजा की कुछ मंत्रिमंडल भी कोई काम नहीं है
वह भी राजा की पाप में कंधों से कंधे मिला कर चलता है
बिना प्रवाह की अंजाम का
वह अपने ही नगरी को बर्बाद करने की ठीका ले रखा है



2


और अभी है कुछ लोग ऐसे इस नगरी में
जो उस राजा की गुण गाता है
अपने आंखें बंद करके बैठा है
सच को सुकारना नहीं चाहता

अपने ही मंग्रट कहानियों में अपने राजा को नायक बताता है
और खुद को उनका प्रिय सेवक

वह अनदेखा करता है
अपने राजा के हर गुनाह हर गलतियों को
वह चाहता ही नहीं की
हकीकत उनके हिसाब से अलग हो

वह मानना चाहता ही नहीं कि
उसका राजा यह एक ऐसा सूअर है
जो पूरा राज्य को गंदा कर रहा है


और इस सूअर की गंदगी में भागीदरी
वह कुछ अंधे प्रजा भी है
जो देखकर अभी अनदेखा करता है




3

शायद इसलिए उनके घर में आप तलाक रोशनी है
अंधेरा तो किसी और का घर हुआ है

उनके दिए अभी तलक बुझे नहीं
उसके घर अंधेरा हुआ नहीं
शायद उसे शगुन मिल रहा है
दूसरों को बर्बाद देकर तो और लाचारी देखकर

पर शायद वह जानते नहीं
वह दिया जिस घर के बुझ चुके हैं
हवा की झोंके से


वो घर तुम्हारे घर के बीच में कुछ ही दूरी है
आंधी आई है तू
सहरें गी तुम्हारे दीवाने भी

Hindi Poem by AbhiNisha : 112031312
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now