रिमझिम फुव्वारें...
अम्बर से बरसीं रिमझीम फुव्वारें..,
वृक्षों और पुष्पों से टप-टप पानी गिरे |
धीरे-धीरे भींग रहा मेरा अल्हड़ तन-मन ,
मैं झूमू, मैं नाचूं, संग मल्हार गीत गाऊं |
मधुमालती की खुश्बू मंद-मंद लेकर ,
भीगी सी भागी सी, मैं ऋतु का आनंद लूं !
छम-छम पायल की झंकार से तुम्हें पुकारूं ,
हर एक गिरती बूंद-बूंद में तुम्हें ढूढूं |
हृदय की मद्धम गति से धड़कती हुई ,
पूर्ण समर्पण की भाव से खूद को खो दूं |
सदा तुम्हें चाहूं, सदा तुम्हें याद करूं ,
सदा मैं जीवन भर, बस तुम्हें प्रेम करूं ||
©®- शेखर खराड़ी
तिथि-२९/७/२०२६