मैं हुं यहां
कविता
मैं हूं यहां
अगर रोना चाहते हो तो मेरे पास आओ
बैठो रोओ
आओ मेरे साथ रोओ
रोना कमजोरी की निशानी नहीं
रोना भावनाओं को बयां करना है
तुम्हें मैं गले से लगा कर रखना चाहती हूं
तेरे साथ रोना चाहती हूं
तेरे साथ ही हंसना चाहती हूं
तेरे साथ जीना चाहती हूं
तेरे ही साथ मरना चाहती हूं
एक तुम ही हो
जिसे मैं अपना कहना चाहती हूं
जिंदगी की पूरे सफर में तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं
जिंदगी की कोई घड़ी ऐसी नहीं है जो
मैं तेरे साथ नहीं चाहती
फिर आंसू आंखों में रोकें क्यों रखा है तूने
आओ मेरे साथ रोले
खुद को बयां कर
और आओ खुद से मैं तुम हम हो ले
खुशी हो या गम
मेरे साथ बैठो मैं हूं ना
तेरे साथ जिंदगी भर के लिए
तुम्हारे गम सुनाने के लिए
तुम्हारे दर्द जाने के लिए
तुम्हारी खुशी को महसूस करने के लिए
मैं हूं ना
तुम्हारे साथ जिंदगी भर के लिए
आओ मेरी बाहों में सो लो
मैं नहीं कहती की दर्द हो रहा है तकलीफ हो रहा है
उसे भूल जाओ
मैं बस ऐ कहती हूं
तुम्हारी दर्द तुम्हारी तकलीफ में
तुम्हारी तन्हाई में
तुम मुझे भी शामिल करो
हमेशा हरदम सांसों की तरह
अपने दर्द को मुझसे साझा करो
मैं उम्मीद की कोई किनारा नहीं हुं
जो कहूं
तुम्हारी जिंदगी में
तुम्हें खुशी दूंगी
तुम्हारी टूटी हुई सांस हूं
मैं बस हूं तुम्हारी साथी
तुम्हारे हर दर्द गमों में तुम्हारे साथ
तुम्हारी खुशी तुम्हारी टूटी हुई सांसों में
जीने की नई उम्मीद लेते हुए
तुमसे बस मैं यह कहूंगी
मुझे तुमसे हिम्मत मिलती है
और मैं चाहती हूं
तुम मिलो मुझसे हर उस वक्त में
जब तुम्हें तकलीफ हो
तुम मिलो मुझसे हर उस वक्त में
जब तुम्हें लगे की दर्द ज्यादा है
पर उसे बयां नहीं कर सकते
क्यों कि उससे भी ज्यादा मर्द होना है
तो मिलो मुझसे
और छोड़ दो मर्दानगी
जो यह कहते हैं की
मर्द रोते नहीं
बस मेरे सामने तुम रो लो
तुम्हारे साथ तुम्हारे गमों में मैं भी रो लूंगी
मैं आपकी प्रिय लेखक अभीनिशा ❤️🦋💯