उफ्फ.. तुम्हारे ये सुर्ख होंठ मेरे अंदर के मरे इंसान को जिंदा करती है। एक बच्चे को मां का दूध नहीं मिलता तो बच्चा क्या करता है?. बिल्कुल वही करता हूं मैं भी जब तुम मुझे नहीं मिलती। अब खुद को नहीं संभाल पाता जब तुम्हारा सुरम्य चेहरा मेरे भिक्षुक आंखों के सामने आता है। मै तुम्हारे हुस्न का गुलाम हूं। तुम वो हो जो ख्वाबों में भी दिखता है, मेरी ज़िंदगी को रंग देता है। तेरी आँखों में खो जाने का एहसास, मेरी मोहब्बत का एक सच्चा इजहार है। तुमसे प्यार करना मेरी आदत है, तुमसे दूर होना मेरी मुश्किल है। मेरा सपना है कि तुम मेरे चाय में चीनी मिलाओ और मैं तुमसे कहूं कि " चीनी ज्यादा मीठी हो गई, बिल्कुल तुम्हारी हुस्न की तरह"। ख़ैर .. सच यही है कि तुम मेरी नहीं हो। सच यही है कि तुम मेरी कभी हो ही नहीं सकती। ♥️