कविता
तुम मिलो मुझसे
दिल के दर्द संभाल नहीं पा रही हूं
मिलो तुम आकर मुझसे
अभी की अभी
मैं जिंदगी से दूर मौत की बहुत ही करीब हूं
अगर तुम मुझे अभी मिलते हो तो
शायद मैं सोचूं फिर से जी उठने की
जिंदगी से कोई उम्मीद नहीं
मैं रुकी हुई घड़ी की सुई की तरह
कब तलक रुकूंगी पता नहीं
मिलो तुम मुझसे अभी की अभी
शायद तुम्हारे साथ चल परू टूट कर वही विखरने की जगह
यह दुनिया दुनिया मेरे किसी काम की नहीं
मेरा यहां कोई भी अपना नहीं है
बस उम्मीद है मोत मिले
और उम्मीद है मौत से पहले तुम मिलो मुझसे
कहानी हमारी कभी शुरू हुई ही नहीं
पर मैं चाहती हूं
तुम मिलो मुझसे
और इस कहानी को अंत दो
यह अजीब बात है
जो कहानी कभी शुरू हुई ही नहीं
उस कहानी को अंत देना
पर मेरी कल्पनाओं की दुनिया एक कहानी है
जिसमें तुम हो हकीकत की तरह
और मैं चाहती हूं
हकीकत बन तुम कर लौट
आओ तुम मेरे पास मेरे अंतिम समय में ही
मुझे डर नहीं कि मेरे साथ क्या होगा
पर अफसोस है कि कहीं मैं सारी कहानियां
अधूरा छोड़कर ना मर जाऊं
कौन कैसा है
किस लिए हर दिन मैं मर से जाती हूं
जीते जी शायद इस बात का पछतावा
मुझे अंतिम दिन ना हो
पर इस बात का पछतावा होगा
तुम और मेरी कहानी दोनों अधूरी रह गई
इस पल में
मैं सचमुच में मर जाना चाहती हूं
बिना कोई अफसोस के खुद की जान लेना चाहती हूं
पर उससे पहले मैं चाहती हूं
तुम आकर मिलो मुझसे