"ठहरा हुआ पल"
[मुखड़ा] ढलती शाम और शांत हवा,
दिल में छुपा है एक ख़ामोश समां।
लहरों की धुन पर बहता जाए,
मन का यह पंछी, ढूंढे नया रास्ता।
[अंतरा 1] उम्मीदों के रंगों से सजी है यह राह,
हर मुश्किल में छुपी है एक नई चाह।
सपनों के पन्नों पर लिखी है दास्तान,
कोशिशों से ही बनता है इंसान।
[अंतरा 2] सब्र की राहों पर कदम बढ़ते जाएं,
जो देखे हैं ख्वाब, वो पूरे हो जाएं।
आज का अंधेरा कल रोशनी लाएगा,
हर बहता दरिया अपनी मंज़िल पाएगा।