सिर्फ़ तुम
जब जीवन की राहों पर अनिश्चितताओं के बादल घिरते हैं,
तुम्हारे होने भर से मेरे भीतर दीप प्रज्वलित होते हैं।
तुम वह मौन आश्वासन हो, जो शब्दों का मोहताज नहीं,
वह अटूट विश्वास हो, जिसके आगे कोई भय ठहरता नहीं।
मेरी हर उच्छृंखल इच्छा को तुमने स्नेह से दिशा दी,
मेरी हर नमी को अपनी हथेली पर रखकर हँसी दी।
तुम्हारे साथ चलूँ तो लगता है—आकाश मेरी मुट्ठी में है,
हर कठिनाई क्षणभंगुर और हर स्वप्न मेरी दृष्टि में है।
तुम मेरे जीवन का वह अडिग तट हो, जहाँ लौटकर
मन अपनी सारी थकान, सारी व्याकुलता चुपचाप रख देता है।
तुम प्रेम से कहीं अधिक हो—मेरे निडर होने का कारण हो,
मेरी मुस्कान का मौन रहस्य, मेरे जीवन का सबसे सुंदर विश्वास हो।
जन्मदिन पर तुम्हें क्या दूँ—मेरे पास तो बस यह हृदय है,
जिसकी हर धड़कन आज भी तुम्हारे होने को अपना सौभाग्य कहती है।