तेरी गली में अब जाना छोड़ दिया,
मैंने हँसना-हँसाना छोड़ दिया।
जब से तुम मुझे छोड़ गई हो,
मैंने हर रिश्ता निभाना छोड़ दिया।
फूल तेरी हिज्र में मुरझा गए,
परिंदों ने आशियाना छोड़ दिया।
मुझसे छोड़ा न गया मयख़ाना कभी,
हाँ, मगर सिगरेट सुलगाना छोड़ दिया।
मैं तेरे ग़म में इस क़दर डूबा कि,
मैंने जन्मदिन मनाना छोड़ दिया।
मुझसे अब दूर जाने वाली,
जा, तुझपे हक़ जताना छोड़ दिया।
✍️प्रकाश कुमार