समय का किरदार
नर ने नारी को,
पशुओं ने जंतुओं को—
न जाने इस संसार ने
कितने रूपों में बाँटा है।
यह संसार प्रारंभ से अंत तक,
एक अनजानी यात्रा है।
प्रारंभ से मध्य और मध्य से अंत तक,
हर जीवन अपनी कहानी लिखता है।
हर किसी को लगता है,
कि वह अंधकार में घिरा हुआ है।
पर वही अंधकार कभी-कभी,
एक नई रोशनी का आधार बन जाता है।
अंधकार का यह दौर,
मन को मौन कर देता है।
समय की तेज धार में,
हर किरदार बदलता रहता है।
मध्य से अंत तक का सफर,
अभी भी अनजाना है।
क्योंकि जीवन के इस रंगमंच पर,
हर व्यक्ति एक नया किरदार निभाता है।