न होगा कोई पुनर्जन्म,
न मिलेगा कोई ब्रह्माण्ड दूसरा।
यदि आपने प्रिय को यहां खो दिया,
मानो अनंत काल तक खो दिया।
फिर न यह रूप होगा,
न यह नाम होगा,
न इस तरह सुकून देती हुई शाम होगी।
जो समेट सकते हो,
इसी एक जीवन में समेट लो,
क्योंकि इसके बाद सिर्फ एक अंतहीन सूनापन होगा।
न फिर यह सावन बरसेगा,
न फिर यह तड़प होगी,
न फिर दो रूहे इस तरह मिलने को रोएगी।
जो आज है, बस यही सच है मेरे दोस्त,
बिछड़ गए तो फिर ख्वाबों में मिलकर भी न मिलेगा।
Arati 🌷