पुरुष एक वफ़ादार औरत को भी कहाँ संभाल पाता है -
कभी उसे ज़िम्मेदारियों के बीच खो देता है,
कभी अपनों की ख़ातिर उसका हाथ छोड़ देता है...
और कभी अपनी ही ख़ामोशी से उसे इतना अकेला कर देता है कि वो साथ होते हुए भी उससे दूर हो जाती है।
फिर एक दिन... उसे खोने का अफ़सोस तो होता है,
मगर तब तक वो औरत ख़ुद को संभालना सीख चुकी होती है।
आरती 🌷