मैं और मेरे अह्सास
सखी सजाओ आँगन कान्हा घर आया हैं l
साथ अपने सभी दोस्तों को भी लाया हैं ll
जैसे कई दिनों के भूखे हो उसी तरह से l
साथ बैठकर मक्खन मिसरी खाया हैं ll
कब से इंतजार कर रहीं थीं दीदार को l
दिवानी राधा ने चैन ओ सुकून iपाया हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह