छोड़ के नीड़ पंछी एक दिन उड़ जाएगा
खाली नीड़ राह तकता पीछे रह जाएगा।
खाली हाथ आया था, खाली हाथ जाएगा
कर्मों के सिवा ना कुछ साथ तेरे जाएगा।
माया माया क्यों करता बंदे! माया महाठगिनी
एक की होकर सगी भला, देखा कभी यह टिकती।
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से खाएगा
तेरे कर्मों का हिसाब इसी जन्म में पूरा हो जाएगा।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati