कविता
दर्द में अगर जिंदगी हो तो क्या
दर्द अगर कभी कम ना हो तो
दर्द में जीना सीख लेना एक मात्र जरिया है
इस दर्द भरी जिवन को सफल बनाने की लिए
दर्द में अगर जिंदगी हो तो क्या
आनें वाली सांसें आखरी हो तो क्या
हम फिर भी चल रहे हैं
जिंदगी की पूरी सफर के लिए
आने वाली आखरी डगर के लिए
दर्द अगर कभी कम ना हो
गम अगर दिल को हरदम हो
तो आंखें भरते रहेगे
हम अंदर से तरफते रहेंगे
तरफ तरफ कर मारते रहेंगे
इस तड़फन में जाने क्या है
हरदम आंखें भर रहा है
चेहरे देख लगता है गम नहीं है
मगर दर्द हुआ कब कम है
सीने के अंदर झांक कर देखो
कुछ है दिल में दवे बरसो पुराने
जिसमें लगा कभी मरहम नहीं है
यह तड़पन यह धड़कन यह सुस्त पड़े निगाहे
बयां बार-बार कर देता है
कुछ है जो बयां हुए नही
दर्द है जिसका दवा मिता नही
ज़ख्म है जिसे देखा गया नहीं
बेचेन धड़कन है जिसे सुना गया नही
फिर भी धड़कन धड़कना छोड़ नहीं रहा
आंखें बहती है पर दर्द बयां कर नहीं रहा
बेजान कदम आगे बढ़ रही है
और एक नई भरम लिए
बस सफर पर चल रही है
दर्द कम नहीं हुआ तो क्या
दर्द भरी साथ आलम लिऐ
ए सांसे चल रही है
बहुत सारे दर्द और पछतावे साथ
विना थके के सिकायत किऐ