आ...... गया....... है ➡👻🖤
काल गढ़ की तारा - 4
दुल्हन जैसा सजा आँगन, बारातियों की जगह मौत का साया!
रुद्र दूल्हा बना है दिल का इंतजार तारा या दुल्हन🧟♀️🧛♀️?
दीयों से सजा है आँगन, पर छाया है घोर अंधेरा,
दूल्हा बन बैठा रुद्र, ये कैसा मौत का फेरा।
गेंदा फूल महक रहे, पर हवा में खौफ बसा है,
हज़ार दीयों की लौ में, कोई राज़ छिपा हंसा है।
तारा चले जिस डगर, वो डगर नहीं आसान,
काल गढ़ की दीवारों में कैद है उसकी जान।
अब देखो तारा बनेगी तारा, या बुझेगी बन शमशान।