बात सिर्फ़ लगाव की है, जो उस एक ख़ास शख़्स को बाक़ी दुनिया से अलग बनाता है।
और जहाँ लगाव है, वहाँ प्यार, इंतेज़ार, सवाल, नाराज़गी, शिकायत, ग़ुस्सा भी है, वो भी पूरे हक़ के साथ।
जिस दिन लगाव ख़त्म हो जाएगा, उस दिन वो ख़ास शख़्स भी बाक़ी दुनिया का ही हिस्सा लगने लगेगा।