"अनकही वजह"....
जिसकी चाहत होती है, वो हर बार नसीब नहीं होता,
हर ख़्वाब आँखों के क़रीब नहीं होता।
किसी की दुआ को मिल जाती है मंज़िल,
तो किसी की दुआ का कोई जवाब नहीं होता।
कभी जो माँगा, वो मिल जाता है,
कभी बिना माँगे ही कुछ ख़ास लिख जाता है।
हम समझते हैं कि यही चाहिए था ज़िंदगी में,
पर वक़्त गुज़रता है तो कोई और राज़ समझ आता है।
शायद हर चाहत का मुकम्मल होना ज़रूरी नहीं,
हर दुआ का क़ुबूल होना ज़रूरी नहीं।
कुछ चीज़ें बस इसलिए नहीं मिलतीं हमें,
क्योंकि हर अधूरी चीज़… बेवजह अधूरी नहीं। 🌙
~ Adya