इंसान हो इंसानियत को समझो ....
अभी अभी एक केस हुआ एक स्टाफ ने दस हजार की सैलरी के लिए २४ करोड़ की कंपनी जला दी
बहुत अच्छा किया मै उसकी जगह होती तो मैं भी यही करती अच्छा क्यों ना करूँ तुम्हारा २४ करोड़ तुम्हे मुबारक ..... तुमलोग स्टाफ रखते हो तो तुम्हे लगता है तुमने उसे खरीद लिया वाह रे पढ़े लिखे लोग अरे कभी तुमने उसकी मजबूरी को समझा कभी जानने की कोशिश की उसने ऐसा क्यों किया क्यों आखिर क्यों तुमलोग स्टाफ को गुलाम समझते हो
हो सकता है वो दस हजार ही उसके लिए एक लाख जितने मायने रखते हो क्यों नहीं समझ पाते । समझो कम देने वाला नहीं कम करने वाला बड़ा होता है अगर कम करने वाला ही ना हो तो क्या करोगे चल जाएगी तुम्हारी कंपनी चल जाएगा तुम्हारा राज ।
इंसान हो इंसानियत को समझो किसी की तकलीफ को समझो हैवaन बन के मत रहो .....वरना २४ करोड़ क्या २४ अरब में भी आग लगाना हो तो कोई सोचेगा नहीं ........
बात कड़वी है कुछ लोगों को लगेगी
इंसान हो इंसानियत निभाओ ......
जय हिंद जय भारत