मैं और मेरे अह्सास
अपनी मंजिल
हौसलों के साथ अपनी मंजिल की और आगे बढ़ना चाहिए l
ख़ुद के विकास की सीढ़ी को एक के बाद एक चढ़ना चाहिए ll
अपनी मंज़िल को पाने की चाहत में भटक ना जाओ तो l
मंजिल की और जाने वाला रास्ता अच्छी तरह पढ़ना चाहिए ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह