एक अंत और एक शुरुआत है
जिंदगी की कितनी अजीब बात है
कुछ नहीं बचा अब कहने को
यहाँ आकर खामोश हर अलफ़ाज़ है
हमे खुद की खबर नहीं थी यारो
किसी ने कहा तू आफ़ताब है
हम तो खुद को आम आदमी कहते है
तुम कहते हो कि तू नायाब है
कितनी मर्जी करे शोर दुनिया
हम खामोशी से देते जवाब है
मुझे समझना है तो
ध्यान से पढ़ मुझे
हम तो बड़ी खुबसूरत किताब है
आजा गहरी डुबकी लगा ले
हम नदी नहीं है जो बह जाए
हम तो ठहरा हुआ गहरा तालब है