पानी में रहो, मगर ग़म को छूने न दो,
कमल-सा खिलो, कीचड़ को छूने न दो।
दुनिया की हवाओं में झोंके तो लाख हों,
दिल की रौशनी को कभी बुझने न दो।
रिश्तों के समंदर में डूबे रहो सदा,
मगर नफ़रत की लहरों को छूने न दो।
गंदगी जहाँ भर गई उस जहाँ में भी,
ख़ुद की ख़ुशबू को फीका होने न दो।
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