मैं और मेरे अह्सास
सुकून के पल
सुकून के पल छीन लिये यादों ने l
बहुत इंतजार करवाया है वादों ने ll
मुस्किल से आँख बंध की थी ओ l
नीद उड़ा दी ख्वाबों के जालों ने ll
हुस्न की मल्लिका को देखकर ही l
नशीली महफ़िल सज़ाई साजो ने ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह