धड़कनों में तेरा नशा उतर आता है
साँस लेते ही दिल बहक सा जाता है
तेरी नज़रों की वो हल्की सी छुअन,
बिन पिए ही मुझमें जाम उतर आता है
रात चुपके से सिमट आती है बाहों में,
तेरा एहसास जब लिबास उतर आता है
होंठ ख़ामोश हैं, पर दिल की ज़ुबाँ से,
हर एक जज़्बात बेहिसाब उतर आता है
तू पास न हो फिर भी कमी महसूस नहीं,
इश्क़ बनकर तू हर पास उतर आता है
संभलना चाहूँ भी तो सम्भल ना पाऊँ,
तेरी यादों का खुमार लाजवाब उतर आता है
नाम तेरा जो लिया मैंने,,,,,,,,,,,
हर शेर में इश्क़ बेहिसाब उतर आता है