समय ✨
आज मैं फिर भाग रहा हूँ, किससे और किसके लिए,
कदाचित स्वयं से स्वयं के लिए।
मैं एकांत के पीछे भाग रहा हूँ, या चुनौतियों से भाग रहा हूँ।
भागने से होगा क्या? क्या होगा न भागने से भी?
मैं (शरीर)नहीं भागूंगा, तो भी कोई है (समय) जो भागेगा।
वो (समय) भाग रहा है, पर मैं नहीं।
ठहराव अच्छा है, अगर सही व्यस्तता के तले हो।
लेकिन ठहराव बहाना भी तो है , खुद को व्यस्त बताने का,
गलत व्यस्तता जीवन को नीरस बना देती है,
और नीरस जीवन भी, क्या कोई जीवन होता है ?
कोशिश कर रहा हूँ तेरे बहाव (समय) में सही व्यस्तता खोजने की।
कोशिश कर रहा हूँ तेरे बहाव (समय)में सही चुनौती खोजने की।
कोशिश कर रहा हूँ तेरे बहाव(समय) में सही एकांत खोजने की।
मैं तेरे बहाव में जाग्रत जीवन चाहता हूँ।
मैं तेरे बहाव में एक जीवन युक्त आनंद चाहता हूँ।
मैं तेरे बहाव में खो जाऊ उससे पहले मैं तुम्हे समझना चाहता हूँ।
- यथार्थ