किस्मत से ही मिलता है
कविता पार्ट 1। गीत
किस्मत से ही मिलता है
जो भी यहां मिलता है
और हम किस्मत के मारे हैं
तन्हा परे दिल बेचारे हैं
हां हम किस्मत के मारे हैं
तन्हा परे दिल बेचारे हैं
दिल की खाता है जो दिल लगाया तुमसे
दिल की खाता है जो दीवाना बन गया मैं तेरे
किस्मत से ही मिलता है
जो भी यहां मिलता है
पर हम किस्मत के मारे हैं
तन्हा परें बेचारे हैं
दिल को दो सजा
हमको छोड़ो दिल की गलती है
इस दिल के वजह से हम हार गए
आके तुम्हारे प्यार में हम मर गए
हा इस दिल की वजह से हम हार गए
तुम्हारे प्यार में हम मर गए
मरना हमारा तय हुआ
दिल दगाबाज तुमसे दिल लगा के अजय हुआ
हा मारना हमारा तेय हुआ
दिल दगाबाज तुमसे दिल लगा के अजय हुआ
हम तो फिरते फिरते सफर पे
कुछ ना हाथ मेरे आया
तुम्हारे डगर पर हम इतनी बेबस हो गए
इंतजार में तुम्हारे खुद को खो गए
ऐ किस्मत कैसा है
कौन जाने
मेरे लिए कभी अपना ना हुआ
मेरे दिल मुझे अपना ना पहेचाने
हा हु हू हू हु हा हा हा
हु हु हू
वो गेरत यह दुनिया भी मुझको अकेला छोड़ गया
हर घड़ी
और अकेलेपन से हम डरते हैं
और सभी को यह पता है
इसीलिए हमको सभी दर्द देते हैं
अकेलेपन में है दर्द गम तन्हाई बेचैनी
इस दर्द गम तन्हाई बेचैनी को संभल ना सकते हैं
और यह दिलबर भी अच्छी तरह जानते हैं
तभी तो दिल लेकर जिसमें पे सित्तम ढाते हैं
दुनिया कितना जल्दी बदल गया
हमें अपने भी पीछे छोड़ कर आगे बढ़ गया
अकेले तनहाई की सफर है
मुश्किल होता है डगर पे चलने में
चलते चलते तक थक गए
अब चैन आए जलने में
जाने वह कैसे लोग हैं
जिस पर किस्मत मेहरबान है
जब सर उठा कर आसमान की तरफ देख तो लगता है
हम बरी नादान है
दयावान वो किस्मत नहीं
जो किसी पे रेहमत बरसाए