मेरी आवाज को दबा के रक्खा गया
मैं चिराग था मुझे रातभर बुझाके रक्खा गया
जब भी कहता मैं सच कोई
बड़ा शोर मचा के रक्खा गया
मेरा दिल बहल जाये इस खातिर
आईना सामने आंखों के रक्खा गया
समझते रहे वो मुझे इक कालिन
पाँव के नीचे बिछा के रक्खा गया
हम परिंदों के कतर के प़र
आसमां हमसे छुपा के रक्खा गया
अभी जिंदा हूँ,नब्ज टटोलो मेरी
हमें मुर्दो के संग क्यूं रक्खा गया