रावल रतन सिंह और महारानी पद्मिनी
यह अध्याय खिलजी के आक्रमण को प्रेम कहानी के बजाय सभ्यता के संघर्ष के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें रानी पद्मिनी के अस्तित्व की पुष्टि और मेवाड़ के गौरवशाली प्रतिरोध का वर्णन है। इसके साथ ही, यह अध्याय गोरा-बादल के बलिदान, रानी की कूटनीतिक सूझबूझ, और 16,000 महिलाओं के जौहर को प्रमुखता से दर्शाता है, जो सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया।
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