Hindi Quote in Poem by Akash Gupta

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बड़ा होने की जल्दी थी...

बड़ा होने की बहुत जल्दी थी बचपन में,

लगता था...

बस एक बार बड़े हो जाएँ,

फिर ज़िंदगी अपनी होगी।

न कोई डाँटेगा,

न पढ़ाई का डर होगा,

न सुबह-सुबह स्कूल जाने की जल्दी होगी।

सोचते थे...

जेब में पैसे होंगे,

दोस्त होंगे,

घूमेंगे,

जो मन करेगा वो करेंगे।

लेकिन...

किसे पता था,

बड़ा होने का मतलब

सिर्फ़ उम्र का बढ़ना नहीं होता।


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जब स्कूल में था,

तो लगता था कॉलेज की ज़िंदगी सबसे खूबसूरत होगी।

नई दुनिया होगी,

नए दोस्त होंगे,

और मेरे पास भी एक Ranger साइकिल होगी।

जिसे चलाकर मैं पूरे शहर में घूमूँगा।

लेकिन कॉलेज आया...

और साइकिल नहीं आई।

कुछ सपने रास्ते में ही रह गए।


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फिर सोचा...

कॉलेज खत्म होगा,

तो नौकरी मिलेगी।

अपनी कमाई होगी।

माँ-बाप को खुश रखूँगा।

घर की हालत बदल दूँगा।

लेकिन...

डिग्री हाथ में आई,

और नौकरी नहीं आई।

सपने फिर थोड़े छोटे करने पड़े।


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फिर घर से दूर जाना पड़ा।

उन लोगों से दूर,

जिनके साथ बैठकर खाना खाता था।

जिनके साथ हँसता था।

जिनसे लड़ता था।

जिन्हें छोड़ने का कभी सोचा भी नहीं था।


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अब कमरा है,

चार दीवारें हैं,

और एक मोबाइल है।

जिसमें घर की तस्वीरें हैं।

और उन्हीं तस्वीरों को देखकर

कभी-कभी आँखें भर जाती हैं।


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बचपन में लगता था

पैसे होंगे तो खुश रहेंगे।

आज पैसे कमाने निकल पड़े हैं,

पर खुशी कहीं पीछे छूट गई है।


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अब समझ आता है,

पापा इतने चुप क्यों रहते थे।

माँ रात को देर तक जागती क्यों थी।

घर चलाना कितना मुश्किल होता है।

और ज़िम्मेदारियाँ

कितनी भारी होती हैं।


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बचपन में

बीस रुपये खो जाएँ,

तो पूरी दुनिया खत्म लगती थी।

आज हजारों खर्च हो जाते हैं,

फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है।


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पहले दोस्त बिछड़ते थे,

तो रो लेते थे।

आज अपने बिछड़ जाते हैं,

और रोने का भी वक़्त नहीं मिलता।


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बचपन में

जल्दी बड़ा होना चाहते थे।

आज दिल करता है

कोई वापस उस स्कूल की घंटी बजा दे।

कोई फिर से होमवर्क दे दे।

कोई फिर से कह दे—

"बेटा, अभी तुम छोटे हो..."


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क्योंकि अब समझ आया है,

बड़ा होना कोई उपलब्धि नहीं थी।

बड़ा होना तो

धीरे-धीरे अपने सपनों का छोटा होते जाना था।


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कुछ सपने पूरे नहीं हुए।

कुछ लोग साथ नहीं रहे।

कुछ रिश्ते छूट गए।

कुछ इच्छाएँ अधूरी रह गईं।


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लेकिन फिर भी...

हर सुबह उठकर

हम मुस्कुरा देते हैं।

क्योंकि हम लड़के हैं।

हमें बचपन से सिखाया गया है—

दर्द छुपाना,

ज़िम्मेदारियाँ उठाना,

और चलते रहना।


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और शायद...

हर लड़के की कहानी कहीं न कहीं

यही होती है।

बचपन में बड़ा होने का सपना,

और बड़े होकर...

बस थोड़ा सा बचपन ढूँढते रह जाना। 🖤🥀

— आकाश गुप्ता ✍️
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