पिता का होना जैसे
पिता का होना जैसे
सर पे एक छत का होना
धूप-बारिश आँधी से बचाए
सारा श्रेय दीवारे ले जाए
खुद हमेशा उपेक्षित रह जाए
पिता का होना जैसे
जादुई छड़ी का होना
जो मांगो वो मिल जाए
हर जिद पूरी हो जाए
इच्छा पूरी होते ही
छड़ी एक कोने में
खड़ी नजर आए
पिता का होना जैसे
ईश्वर हो जाना
वक्त पड़ने पर ही
सबको पिता की याद आए
जरा सा मन का ना होने पर
इंसान तो ईश्वर को भी
खूब बुरा सुनाए
की जिसके लिए पूरी जिंदगी हवन
वो परिवार ही आँखे चुराए
ना चाहा कभी किसी से कुछ
दिया हमेशा अपनी हैसियत से ज्यादा
वो पिता अपने बुढ़ापे में
संग ना किसी को पाए
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली