निराश दिल
निरास दिल उलझा हुआ है
उम्मीद नहीं है
दर्द से भरा हुआ है
भावनाएं सुन्य है
मर जाने का मन करता है
फिर भी न जाने क्यों
मरने के बाद उठने का मन करता है
मरने के बाद की जिंदगी देखने के लिए
क्यों नहीं समझ में आता
क्या अब भी जिंदगी से कोई उम्मीद है
जिंदा लाश की कि तरह बस एक जगह पडी हुई हुं
क्या इस लास में हलचल हो रहा है
इतनी हार इतनी ठोकर इतनी थकावट के बाद भी
निराश दिल उलझा हुआ है
उम्मीद नहीं
फिर भी आंखें बात करने के बाद भी
जिंदगी जीते रहना चाहता है
न जाने क्यों