फिर बोलेंगे की कहनी क्यो नही आ रही । कहानी पर 200 से ज्यादा व्यूज है लेकिन डाउनलोड 100 का आंकडा भी पार नही कर रहे और रिव्यू उनके तो क्या ही कहने। अब समझ आ रहा है की कहानी या प्लैटफॉर्म की दिक्कत नही है। कमी हिंदी साहित्य को पढने वाले पाठको की है। हिंदी भाषी पाठको को कहानी पढनी तो होती है लेकिन बात जब रिव्यू और पैसे देने की आती है वो उनसे होता नही है।मै रूड नही होना चाहती पर अब बुरा लगता है। महनत करो और उसकी बेकद्री हो तो दिल दुखता है। सच बता रही हू ये मेरी आखरी कहानी है इस प्लैटफॉर्म पर। आई स्टिल लव यू का कल पहला भाग आ रहा है अगर उसपर कमेंट नही मिले तो माई डियर प्रोफेसर खत्म कर कोई कहानी नही लाउंगी। आप लोग कद्र नही करते..ना लेखक की ना कहनियो की। इसी तरह का बिहेवियर रहा तो हिंदी साहित्य और बुरी तरह पिछड जाएगा। पहले ही कोई हिंदी नोवल पढना पसंद नही करता। कभी इंग्लिश कहानियो पर रिव्यू देखे है। वो होता है और नी को प्यार देना , लेखक और कहानी..दोनो की ही कद्र करना। मेरा क्या है..मै तो इंग्लिश मेलिखना शुरू कर दुंगी।