वो दौर आऐगा,
बस ज़रा ठहरना,
अभी जो अँधेरा है,
उसे भी तो गुज़रना है,
मेहनत की राह पर,
बस चलते ही जाना है,
हर हाल में अपने,
कर्म को निभाना,
नीयत में सच्चाई रखना,
दिल में ईमान रखना,
वक़्त कभी एक-सा नहीं रहता,
हर मौसम बदल ही जाता है,
जो आज आँसुओं में डूबा है,
वही कल मुस्कुराता है,
किस्मत बुरी नहीं होती,
कभी मन ही थक जाता है,
जो हिम्मत से आगे बढ़ता है,
वही मंज़िल को पाता है,
वो दौर आऐगा,
ज़रूर आऐगा...
मनोज नावडीया
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