लकीरें कागज़ पर खिंचीं और तराना बन गया,
दो दिल जब पास आए तो अफ़साना बन गया।
ना होंठ हिले ना बातें हुईं, बस नज़रें टकराईं,
पेंसिल की हर एक रंगत में मोहब्बत मुस्कुराई।
रंगों की ज़रूरत किसे, जब शेड्स में इतनी गहराई हो,
लगता है जैसे हर सांस में सिर्फ़ उसी की परछाई हो।
हुनर की इस कलाकारी ने जादू ऐसा चलाया है,
मैंने अपनी ही लकीरों में पूरा जहां बसाया है।