मैं और मेरे अह्सास
घनघोर
आकाश में घनघोर बादल छाए हुए हैं l
कड़ी धूप में कहां घुम के आए हुए हैं ll
कहां से आए है और कहां होगी बारिश l
साथ अपने घेरा अंधकार लाए हुए हैं ll
कहीं ये सैलाब सबकुछ बहा ना ले l
सब के दिलों में तूफान पाए हुए हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह