उम्मीद की दूसरा और और इंतजार लिखा
कविता
तुम्हारे और मेरे बीच हजारों मिलो की है फासला
और गहरी तुम्हारी यादों से जुराऊ
और इंतजार रहा तुम्हारा और हजार सारो से
शाम की तरह मैं ढल गई
रेत की तरह समय के हाथ से फिसल गई
और मैं मिट्टी गहरी समुद्र में जा मिल गई
और मे ऐ सोचने पर मजबूर हो गई
कि यह किस्मत हमारी
पर उम्मीद है
कि हम मिलेंगे और सो साल बाद सी
हजारों साल बाद भी
उमिद की दूसरी और
और इंतजार लिखा है हजारों साल तक
जब तलक हवाई अपनी रुखत नहीं मोड़ती
जब तलक समुद्र सुख नहीं जाती
जब तलक धरती बंजर नहीं हो जाती
जब तलक तुम हजारों मिलो से
इस सूखी धरती पे अपनी कदम नहीं रखते
तव तलक इंतजार है
समुद्र की नीचे सांस लेते मैं मिट्ट रेत सी