मैं और मेरे अह्सास
जिंदगी के रंग
जिंदगी के रंग बदलते रह्ते हैं l
वक्त के साथ निखरते रह्ते हैं ll
भावना के रंगों का केनवास है l
वो निगाहों से छलकते रह्ते हैं ll
धूप की तल्खी, छांव के नजारे l
उम्मीदों से वो महकते रह्ते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह