मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती होगी, लेकिन इस बार यह और गहरी होगी, और भी ज्यादा भावनाओं से भरी हुई। यह वही कहानी है, लेकिन अब मैं इसे वैसे शब्दों में पिरोऊँगी, जैसे मैंने इसे अपने मन में जिया था—हर एहसास को, हर भावना को और भी खूबसूरती से व्यक्त करते हुए। कुछ किस्से वही रहेंगे, लेकिन इस बार वे और ज्यादा जीवंत होंगे, क्योंकि मैं इसे केवल लिख नहीं रही, बल्कि जी रही हूँ।
दिल ने जिसे चाहा - 1
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती होगी, लेकिन इस बार यह और गहरी होगी, और भी ज्यादा भावनाओं से भरी हुई।यह वही कहानी है, लेकिन अब मैं इसे वैसे शब्दों में पिरोऊँगी, जैसे मैंने इसे अपने मन में जिया था—हर एहसास को, हर भावना को और भी खूबसूरती से व्यक्त करते हुए। कुछ किस्से वही रहेंगे, लेकिन इस बार वे और ज्यादा जीवंत होंगे, क्योंकि मैं इसे केवल लिख नहीं रही, ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 2
रुशाली की ज़िंदगी उतनी ही सादी थी, जितनी उसकी सोच। न उसे बनावटी खूबसूरती की फिक्र थी, न ही चिंता कि कोई उसे पसंद करता है या नहीं। लेकिन कहीं न कहीं, उसके दिल के किसी कोने में एक ख्वाहिश जरूर थी—एक ऐसे प्यार की, जो सिर्फ उसकी सादगी के लिए हो, न कि उसकी शक्ल-सूरत के लिए।रुशाली अक्सर सोचती की शायद कोई होता जो उसके लिए छोटी-छोटी चीज़ें करता, बस इस उम्मीद में कि वो नोटिस कर लें। लेकिन रुशाली के लिए ऐसा कोई नहीं था।उसने कई बार फिल्मों में देखा था कि कोई हीरोइन बारिश में भीगते ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 3
रुशाली की ज़िंदगी ठीक-ठाक चल रही थी। वह एक खुशमिजाज लड़की थी, जिसे अब तक न तो किसी से हुआ था और न ही कोई उसे पसंद करता था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी ज़िंदगी में जो होने वाला है, वह उसकी पूरी दुनिया बदल देगा।कुछ दिनों बाद ही एक घटना घटी जिसने उसकी खुशहाल ज़िंदगी में तूफान ला दिया। उसके पापा की तबीयत अचानक खराब होने लगी। घर में सभी परेशान थे। डॉक्टर से दिखाने पर भी कोई राहत नहीं मिली, और कुछ ही हफ्तों में उसके पापा का निधन हो गया। यह खबर उसके लिए ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 4
रुशाली उस अस्पताल के जनरल वार्ड में रात के लगभग तीन से साढ़े तीन बजे अपनी माँ के पास थी। माहौल एकदम शांत था, केवल मशीनों की हल्की आवाज़ें और दूर से आती अस्पष्ट आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। उसकी आँखों में नींद थी लेकिन माँ की चिंता के कारण वह सो नहीं पा रही थी। तभी अचानक उसे हल्की सी आहट सुनाई दी। उसने सिर घुमाकर देखा तो एक युवक वार्ड में दाखिल हुआ। उसकी चाल में आत्मविश्वास था, लेकिन चेहरा बेहद शांत और गंभीर। उसने रुशाली की माँ की ओर देखा और बड़े ही नर्म लहजे में ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 5
रुशाली का वह दिन भी पिछली रात की ही तरह बीता – मन में वही डॉक्टर लड़का छाया रहा साथ ही अपनी माँ की तबीयत को लेकर चिंता भी बनी रही। उसके दिल-दिमाग में कई सवाल और भावनाएँ चल रही थीं। वह डॉक्टर जो हर सुबह राउंड पर आता, कुछ अलग ही था – कुछ खास। अगले दिन सुबह फिर वही डॉक्टर वार्ड में आया, और आज रुशाली ने पहली बार गौर किया कि उसकी आँखों के नीचे काले घेरे थे। उसे यह देखकर समझ आया कि डॉक्टर की ज़िंदगी कितनी कठिन होती है – दिन-रात ड्यूटी, लगातार मेहनत ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 6
रुशाली अब अस्पताल से घर लौट आई थी। जिस तरह से ज़िन्दगी ने उसे झकझोरा था, उसके बाद अब थोड़ा संभलने की कोशिश कर रही थी। मगर अब सिर्फ अपने बारे में सोचना उसके लिए मुमकिन नहीं था। घर की जिम्मेदारियां भी थी, और उस पर अपने दिल के जज़्बात भी।कभी-कभी वो खिड़की से बाहर आसमान को ताकते हुए सोचती —"क्या मैं दोबारा मयूर सर को देख पाऊंगी? क्या किस्मत दोबारा ऐसा मौका देगी?"इन्हीं ख्यालों के बीच रुशाली ने नौकरी ढूंढनी शुरू की। अख़बार में विज्ञापन पढ़ना, मोबाइल में जॉब ऐप्स खंगालना — बस अब तो यही दिनचर्या बन ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 7
अब रुशाली की ज़िंदगी एक तय रूटीन में ढल चुकी थी — हर सुबह उठकर अस्पताल जाना, मरीज़ों की करना, और साथ ही उन गलियारों से होकर गुज़रना जहाँ से अक्सर मयूर सर का आना-जाना होता था।अब तो उसे अस्पताल की दीवारों में भी मयूर सर की मौजूदगी महसूस होती थी। कई मरीज़ों ने मयूर सर की खूब तारीफ़ की थी —"वो बहुत ही अच्छे डॉक्टर हैं...","उनके इलाज से ही आराम मिला...","इतने समझदार और विनम्र डॉक्टर कम ही होते हैं..."रुशाली का दिल हर बार उनके नाम पर और तेज़ी से धड़कने लगता।वो सोचती —"कोई इंसान इतना संजीदा, इतना अच्छा ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 8
रुशाली आज कुछ ज़्यादा ही नर्वस थी। सफ़ेद कोट उसके कंधों पर था, पर आत्मविश्वास कहीं कंधों से फिसलता रहा था। सामने एक दरवाज़ा —Dr. Mayur (MD)उसने नेमप्लेट को देखा और गहरी साँस ली।“यह सिर्फ एक डॉक्टर नहीं… शायद मेरी कहानी का वो पन्ना है, जो अब तक कोरा था।”ठक-ठक।"Come in..." — अंदर से ठहराव भरी आवाज़ आई।दरवाज़ा खोला, और उसकी नज़रें एकदम ठिठक गईं। लाइट पिंक शर्ट, हल्के मोड़े हुए बाजू, और कलाई में सादी सी ब्लैक वॉच। पर सबसे ज़्यादा असर कर रही थी उनकी मुस्कान — शांत, आत्मीय, और आत्मविश्वास से भरी आवाज़।उसने मन ही मन ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 9
कुछ दिन बाद.....सुबह की नर्म किरणों ने जैसे ही खिड़की से झाँककर कमरे को छुआ, एक हल्की सी गर्माहट में फैल गई। रुशाली आज कुछ जल्दी जाग गई थी। अलार्म की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। बीते दिनों के अनुभव ने उसे भीतर से एक अलग ही ऊर्जा दे दी थी—एक अनकहा आत्मविश्वास, जो उसके चेहरे पर झलक रहा था।"आज का दिन बेहतर होगा," उसने खुद से कहा और आईने में खुद को देखा। उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी और आंखों में उम्मीद की चमक।जल्दी तैयार होकर वो हॉस्पिटल पहुंची। रिसेप्शन से कुछ फाइल्स लेनी थीं, कुछ पेपर्स क्लासिफाई ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 10
सुबह के साढ़े नौ बजे होंगे। अस्पताल का माहौल रोज़ की तरह तेज़ और व्यस्त था, लेकिन डॉक्टर मयूर मन में एक बेचैनी थी। वो सीधे अपने कैबिन की ओर बढ़े। कैबिन में दाखिल होते ही उन्होंने इधर-उधर देखा, मगर वहाँ कोई नहीं था।"रुशाली..." उन्होंने धीरे से पुकारा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।कुर्सी पर बैठते ही उन्होंने अपना मोबाइल निकाला और रुशाली को कॉल लगाया। तभी उनकी नज़र पड़ी — रुशाली का फोन वहीं टेबल पर रखा हुआ था। उन्होंने फोन की स्क्रीन को देखा, और फिर उनकी नज़र उस नाम पर टिक गई जिससे उनका नंबर सेव था ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 11
कुछ दिन बीते…रुशाली और मयूर सर के बीच अब एक अजीब सी मगर प्यारी सी दोस्ती पनपने लगी थी।वो पहले सिर्फ सर और इंटर्न का रिश्ता था, अब उसमें अपनापन घुलने लगा था।कभी हँसी-मज़ाक… तो कभी छुपी नज़रों की बातचीत।और हाँ, रुशाली की शरारतें भी अब मयूर सर को मुस्कुराने पर मजबूर कर देती थीं।1st जुलाई — डॉक्टर डे।आज की सुबह कुछ अलग थी।रुशाली ने अपना फेवरेट कलर — सफेद पहन रखा था।सफेद कुर्ता, सिंपल मगर शालीन… उसके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास छलक रहा था। जब तुम अपने फेवरिट कपड़े पहनते हो,तो दिल भी आईने जैसा साफ़ लगने ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 12
कैंटीन की उस टेबल पर बैठकर, जब दो लोग खाने की थाली बांटते हैं…तो सिर्फ खाना नहीं, कुछ अनकही बातें भी साथ बंटती हैं…खाने की थाली आ चुकी थी। गरमागरम पंजाबी सब्ज़ी की खुशबू और नरम फुल्के की भाप में कोई अपना-सा एहसास घुल रहा था। मयूर सर और रुशाली ने खाना शुरू किया। दोनों के बीच वो शुरुआती हिचक अब घुलती जा रही थी, जैसे दो मौसम एक साथ मिलने लगे हों।मयूर सर (हल्की मुस्कान के साथ):"अच्छा रुशाली, ये तो बताओ… तुम्हारा फेवरिट फूड क्या है?"रुशाली (बड़ी मासूमियत से):"मुझे चाइनीज़ और साउथ इंडियन खाना बहुत पसंद है।"मयूर सर ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 13
[अस्पताल की लंबी गलियारे में मयूर सर और रुशाली साथ-साथ कैबिन की ओर बढ़ रहे हैं…]रुशाली के दिल में कुछ कह देने की हल्की सी चाहत थी। शायद एक भरोसा बनने लगा था… या यूं कहो कि कोई एहसास, जो अब शब्द मांग रहा था।रुशाली (धीरे से मुस्कुराते हुए):"सर, मुझे आपके बारे में और भी कुछ पता है…"मयूर सर (आश्चर्य से):"अच्छा! क्या पता है भला? बताओ ज़रा…"रुशाली (शरारत भरी मुस्कान के साथ):"आपके इंटरव्यू में देखा… आप एक साधारण किसान परिवार से आते हैं,कैसे आपने इंटर्नशिप के साथ आगे की पढ़ाई के लिए तैयारी की…कितनी मेहनत, कितने संघर्ष… सच में ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 14
(अस्पताल – सुबह का समय)(रुशाली डायरी बंद करती है और खिड़की से बाहर देखती है। मन सवालों से भरा (मन में सोचते हुए):"मैंने तो सारी फाइलें पढ़ लीं… लेकिन एक सवाल है जो मन से जा ही नहीं रहा… मयूर सर और सुमन के बीच ऐसा क्या है जो इतना जुड़ाव है? वो उन्हें बस एक मरीज़ की तरह क्यों नहीं देख पा रहे?"(अचानक दरवाज़ा खुलता है, मयूर सर अंदर आते हैं। चेहरा गंभीर, आँखों में चिंता की झलक।)मयूर सर:"रुशाली, चलो मेरे साथ।"रुशाली (हैरानी से):"जी सर…"(दोनों अस्पताल के उस कमरे में पहुँचते हैं जहाँ सुमन भर्ती है। सुमन बिस्तर ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 15
अगले दिन सुबह-सुबह जब रुशाली अस्पताल पहुँची, तो माहौल कुछ बदला-बदला सा था। रिसेप्शन पर जाकर उसने जैसे ही के बारे में पूछा, तो उसे पता चला कि सुमन की हालत बिगड़ने के कारण, उसे किसी बड़े शहर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भेज दिया गया है।रुशाली का दिल धक से रह गया।रुशाली (चिंता में):"हे भगवान, सुमन को क्या हो गया...?"वो तुरंत मयूर सर को ढूंढने लगी, लेकिन वो कहीं नज़र नहीं आ रहे थे। न वॉर्ड में, न कैंटीन में... अंत में वो उनके केबिन की ओर बढ़ी। वहाँ पहुँच कर उसने धीरे से दरवाज़े पर दस्तक दी।ठक ठक ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 16
(कुछ दिन बाद ....)समय बीत रहा था...पर इन बीते दिनों में कुछ बदला था।अब रुशाली और मयूर सर एक-दूसरे थोड़ा-थोड़ा समझने लगे थे। बातों से ज़्यादा अब नज़रों की खामोशी कहानियाँ सुनाने लगी थी। वो अब जानने लगे थे कि कौन किस चाय का स्वाद पसंद करता है, किसे मीठा ज़्यादा अच्छा लगता है, किसे खामोश शामें पसंद हैं और किसे बारिश में भीगना।दूरियाँ धीरे-धीरे घट रही थीं...पर इस क़रीब आने का मतलब क्या था?क्या ये सिर्फ़ रुशाली की तरफ़ से था?या मयूर सर भी अब कुछ महसूस करने लगे थे? एक नई सुबह... और एक प्यारा सा एहसाससुबह-सुबह ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 17
सुबह की पहली किरण... और धड़कनों का तेज़ होनाआज की सुबह कुछ अलग थी...रुशाली की आंखें अलार्म से पहले गई थीं। चेहरे पर मुस्कान थी, आंखों में चमक थी, और दिल... धक-धक कर रहा था।रुशाली (खुद से बड़बड़ाते हुए, मुस्कुराते हुए):"आज तो मयूर सर का बर्थडे है... आज उन्हें मेरा बनाया हुआ कार्ड मिलेगा... और शायद मेरा दिल भी।""भगवान करे उन्हें लंबी उम्र मिले, सारी खुशियाँ मिले... और हाँ, अगर थोड़ी सी जगह उनके दिल में मेरे लिए भी हो, तो और क्या चाहिए!"वो बिस्तर से उठी और गुनगुनाने लगी...ना जाने क्यों आज हर चीज़ खूबसूरत लग रही थी। ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 18
उस रात का सन्नाटा...उस रात रुशाली के कमरे में खामोशी थी,पर उसके ज़ेहन में एक तूफान चल रहा था।"क्या सर मुझे पसंद करते हैं?""अगर हाँ, तो मेरे उस सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया उन्होंने?""क्यों बस चुप रह गए?"दिल बार-बार वही सवाल कर रहा था,और दिमाग हर बार नए-नए जवाब ढूंढता।वो सोचती रही —"क्या उनकी चुप्पी में कोई इकरार छुपा था?""या फिर इनकार?"एक और सोच..."अगर वो मुझे पसंद नहीं भी करते,तो भी जब तक उनकी सगाई नहीं होती,मैं अपनी तरफ से कोशिश करूँगीकि मैं उन्हें भी पसंद आऊंऔर उनके परिवार को भी।""पर उनका परिवार?""हम एक ही जाति से नहीं ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 19
सुबह के सात बजे थे…सोमवार का दिन।बाकी दुनिया के लिए ये एक आम सुबह थी, लेकिन डॉ. मयूर के नहीं।आज कई दिनों के बाद रुशाली वापस अस्पताल लौटने वाली थी।मयूर सर के मन की उलझनें...आईने के सामने खड़े मयूर सर के चेहरे पर एक अलग ही रौनक थी।सामान्य दिनों की तरह गंभीर नहीं, बल्कि एक हल्की सी मुस्कान उनके होठों पर थी, जिसे वो खुद से भी छुपाने की कोशिश कर रहे थे।“दिल ने जिसे चाहा था,आज फिर से सामने आने वाला है।क्या वो मुस्कुराकर देखेगी?या फिर... नज़रें फेर लेगी?”उनका मन इन सवालों से भरा था।आज उन्होंने जानबूझ कर ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 20
डॉ. मयूर अभी फोन पर रुशाली की माँ से बात कर ही रहे थे जब उन्होंने ये सुना—"रुशाली अभी रही है बेटा, उसे उठाने ही जा रही थी। आज तो वापस अस्पताल जॉइन कर रही है ना..."इतना सुनते ही मयूर सरके होंठों पर एक राहत भरी मुस्कान आ गई।फोन रखते ही वो तेजी से बिस्तर से उठे, जैसे किसी ने उनके अंदर नई जान फूंक दी हो।मन में एक ही तमन्ना थी —"रुशाली को अपनी आँखों से देख सकूं, ये यकीन कर सकूं कि वो सही सलामत है…"मयूर सर जल्दी से तैयार हुए।आज उन्होंने बिना ज़्यादा सोचे वही white ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 21
रुशाली और मयूर सर की ज़िन्दगी अब पहले जैसी सामान्य लगने लगी थी।कोई बड़ी हलचल नहीं, कोई खास बदलाव लेकिन दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता बनने लगा था — ऐसा रिश्ता जो शब्दों का मोहताज नहीं था।अब तक मयूर सर ने उस सवाल का जवाब नहीं दिया था जो कभी रुशाली ने उनसे पूछा था।पर अब शायद रुशाली को जवाब की ज़रूरत भी नहीं थी।क्योंकि मयूर सर का बर्ताव, उनकी नजरें, उनकी चिंता, हर चीज़ ये कह रही थी कि वो रुशाली को दिल से चाहने लगे हैं...बस ये बात कभी लफ्ज़ों में नहीं आई थी, और शायद ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 22
रुशाली एग्ज़ाम सेंटर से बाहर निकली तो चेहरा चमक रहा था।"थैंक गॉड... पेपर बहुत अच्छा हुआ!" उसने गहरी साँस किया तुरंत मयूर सर को कॉल करे —"सर को बताऊँ कि आज पेपर कितना अच्छा गया..."लेकिन फिर उसने खुद को रोका —"नहीं… ये ख़ुशी कल सामने जाकर शेयर करूँगी।"वो शाम खामोश रही… पर रुशाली का दिल अंदर से गुनगुना रहा था।---अगली सुबहसुबह रुशाली ने हल्का पीला सूट पहना, बाल खुले रखे, होंठों पर हल्की मुस्कान थी। जैसे ही घर से बाहर निकली, मोबाइल बज उठा।"Tring-tring..."स्क्रीन पर नाम चमका — Dr. Akdu।"गुड मॉर्निंग सर!" रुशाली की आवाज़ में एक अलग सी ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 23
कुछ दिन बाद ...आज का दिन बहुत खास था। मगर रुशाली के लिए ये सुबह किसी और ही अंदाज़ शुरू हुई।उसकी माँ कई बार कमरे में आकर कह चुकी थीं —माँ (धीरे से पर्दा हटाते हुए): "रुशाली... उठ जा बेटा। आज तेरा रिज़ल्ट भी आना है।"रुशाली (तकिये में मुँह दबाकर): "माँ... पाँच मिनट और सोने दो ना..."माँ हल्की हँसी के साथ चली गईं।तभी अचानक फोन की घंटी बजी। ट्रिन... ट्रिन...स्क्रीन पर नाम चमका — Dr. Akdu।बस नाम देखते ही नींद उड़ गई। उसने फटाफट फोन उठाया।रुशाली (जल्दी से): "हेलो सर..."मयूर सर (खुश होकर गुनगुनाते हुए): " हैप्पी बर्थडे टू ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 24
पाँच साल का लंबा वक़्त गुजर चुका था।कभी जिन दिनों में मासूमियत, मोहब्बत और सपने भरे थे, अब उन की जगह जिम्मेदारियों और तन्हाइयों ने ले ली थी।सुबह का समय था। खिड़की से आती सुनहरी धूप सीधी रुशाली के चेहरे पर पड़ रही थी।वो गहरी नींद में थी, लेकिन नींद भी उसकी थकान को मिटा नहीं पाती थी।उसके चेहरे पर एक अजीब-सी खामोशी और खालीपन था।रुशाली अब सिर्फ़ वही लड़की नहीं रही जो कॉलेज के दिनों में मासूम और थोड़ी शरारती थी।अब वो अपने ज़िले की जिला अधिकारी (DM) थी।ज़िम्मेदारी ने उसे मजबूत बनाया था, उसका व्यक्तित्व grounded था, ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 25
“कुछ मुलाक़ातें वक्त नहीं, किस्मत तय करती है…”“Excuse me, यहाँ कोई बैठा है क्या?”वो शख्स धीरे-धीरे मुड़ा —और रुशाली कदम जैसे ज़मीन पर जम गए।“डॉ. कुनाल...??”रुशाली (थोड़े आश्चर्य में):“आप… डॉ. कुनाल? आप यहाँ?”वो चेहरे पर वही अपनापन, वही गंभीरता, और वही सौम्यता थी।वो मयूर सर के बहुत खास दोस्त हुआ करते थे,और रुशाली के लिए तो मानो पुराने दिनों की एक जीती-जागती याद थे।डॉ. कुनाल (मुस्कुराते हुए):“हाँ, शायद तुमने मुझे पहचान लिया… पाँच साल बाद भी।”रुशाली (थोड़ी भावुक होकर):“कैसे भूल सकती हूँ?आप और… मयूर सर हमेशा साथ ही तो दिखते थे।”डॉ. कुनाल ने हल्की मुस्कान दी,पर उस मुस्कान में ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 26
मयुर सर…एक ऐसा नाम जिसे सुनकर अस्पताल के लोग सम्मान से खड़े हो जाते थे।अब वे देश के जाने-माने थे—दिलों की धड़कनों को ठीक करना उनका रोज़ का काम था।लेकिन अंदर…उनका अपना दिल पाँच साल से उसी एक जगह रुका हुआ थाजहाँ किसी शाम रुशाली ने उन्हें बिना बोले अलविदा कहा था।बाहर की दुनिया को दिखता था—“Dr. Mayur, calm, composed, always in white.”पर कोई नहीं जानता था किउन्होंने सफेद पहनना कब, किसके लिए शुरू किया था।रुशाली को सफेद रंग पसंद था।वो हँसकर कहती थी—“sir , you look good in white color & it's my favourite color too… perfect!”और जब ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 27
Dr. Kunal तो उस दिन Mayur sir को ये बता कर चले गए थे कि—“शादी में एक बहुत ख़ास आने वाला है…”और बस, इतना कहना ही काफी था Mayur sir के लिए बेचैन हो जाने के लिए।बाहर से वो सामान्य दिखने की कोशिश करते रहे, पर अंदर… मन में जैसे तूफ़ान चल पड़ा था।कौन है वो ख़ास?क्यों आ रहा है?क्यों Kunal इतना रहस्यमयी बन रहा है?शादी में अभी कुछ दिन थे, पर उनके लिए वो दिन भी सदियाँ लगने लगे।उधर, Rushali…वो भी अलग सी बेचैनी महसूस कर रही थी।दिल चाहता था कि Mayur sir से मिले…पर हिम्मत?वो तो जैसे ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 28
वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर गया था।रुशाली और मयूर सर, अब भी वैसे ही खड़े थे— इतने कि एक साँस की दूरी भी ज़्यादा लग रही थी।रुशाली का हाथ अब भी मयूर सर के सीने पर था। उस सीने पर जिसके भीतर दिल आज भी उसी के लिए धड़क रहा था।और मयूर सर का हाथ रुशाली की कमर पर— अनजाने में नहीं, बल्कि उसी हक़ के साथजो कभी कहा नहीं गया था।दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे।लेकिन उनकी आँखें… उनकी आँखें एक-दूसरे से बातें कर रही थीं।यादों का सैलाब — रुशाली के दिल मेंरुशाली की आँखों के ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 29
रुशाली बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।मयूर सर कुछ पल तक उसी जगह खड़े रहे। उन्हें समझ नहीं रहा था कि अभी जो हुआ, वो सच था या कोई ऐसा सपना, जो अचानक आकर टूट गया हो। पाँच साल बाद, इतनी क़रीब आकर भी, वो दोनों एक-दूसरे से कुछ नहीं कह पाए। न कोई शिकायत, न कोई सवाल—बस एक भारी-सी खामोशी, जो मयूर सर के दिल में गहरी उतरती चली गई।जिस लड़की की मौजूदगी कभी उनके सबसे थके हुए दिन को भी हल्का कर देती थी, आज वही उन्हें देखकर भी कुछ बोले बिना चली गई।मयूर सर के ...Read More
दिल ने जिसे चाहा - 30
शादी का venue रोशनी से जगमगा रहा था।चारों तरफ झालरों की चमक, फूलों की खुशबू, और शहनाई की धीमी-सी धुन वातावरण में घुली हुई थी। लोग हँसते-बोलते इधर-उधर घूम रहे थे, बच्चे भाग रहे थे, रिश्तेदार फोटो खिंचवा रहे थे…लेकिन इस शोर और रौनक के बीच… दो दिल ऐसे भी थे, जो सिर्फ एक-दूसरे को ढूँढ रहे थे।Rushali अपनी माँ के साथ venue पर पहुँची।आज उसने खास तौर पर navy blue रंग का लहँगा पहना था—Mayur sir का पसंदीदा रंग।खुले straight बाल उसकी पीठ पर हल्के-हल्के गिर रहे थे। हाथों की चूड़ियाँ चलते समय धीमी-सी आवाज़ कर रही थीं, ...Read More