बेरंग इश्क गहरा प्यार

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एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था, जहाँ रोशनी तो बहुत थी पर गर्माहट की भारी कमी थी।देब खन्ना अपनी स्टडी टेबल के पीछे बैठा था। उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे उसकी बेतरतीब नींद की गवाही दे रहे थे। उसके सामने एक फ़ाइल खुली थी, जिसके पन्ने सफेद थे, लेकिन उन पर लिखी शर्तें काली और कड़वी थीं।

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बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 1

एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था, जहाँ रोशनी तो बहुत थी पर गर्माहट की भारी कमी थी।देब खन्ना अपनी स्टडी टेबल के पीछे बैठा था। उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे उसकी बेतरतीब नींद की गवाही दे रहे थे। उसके सामने एक फ़ाइल खुली थी, जिसके पन्ने सफेद थे, लेकिन उन पर लिखी शर्तें काली और कड़वी थीं। देब ने अपनी महंगी घड़ी की ओर देखा—शाम के ठीक सात ...Read More

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बेरंग इश्क गहरा प्यार - एपिसोड 2

बेरंग इश्क, गहरा प्यारएपिसोड 2: पहली सुबह की दस्तकखन्ना मेंशन की सुबह वैसी नहीं थी जैसी पाखी ने अपने में देखी थी। वहां चिड़ियों की चहचहाहट और मंदिर की घंटियों से दिन शुरू होता था, लेकिन यहाँ की सुबह ठंडी और बेजान थी। भारी पर्दों के पीछे छिपी धूप कमरे में आने की जद्दोजहद कर रही थी।पाखी की आँख खुली तो उसने खुद को बेड के एक कोने में सिमटा हुआ पाया। पास ही सोफे पर देब सो रहा था। सोते हुए उसके चेहरे पर वह कठोरता नहीं थी जो जागते समय रहती थी। उसके माथे पर एक हल्की ...Read More