सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर हमेशा की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे में। लेकिन उन सबके बीच एक लड़की रोज की तरह धीरे-धीरे चलती हुई अंदर आई। सावी। उसके चेहरे पर कोई बनावटी चमक नहीं थी। न भारी मेकअप, न दिखावा। बस हल्की सी मुस्कान — जैसे वो दुनिया से ज्यादा खुद के ख्यालों में रहती हो। वो जैसे ही कॉलेज गेट पार करती है… रुक जाती है। गार्ड के केबिन के पास, उसी कोने में… फिर वही रखा था।
माफिया की मोहब्बत - 1
सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे में।लेकिन उन सबके बीच एक लड़की रोज की तरह धीरे-धीरे चलती हुई अंदर आई।सावी।उसके चेहरे पर कोई बनावटी चमक नहीं थी। न भारी मेकअप, न दिखावा। बस हल्की सी मुस्कान — जैसे वो दुनिया से ज्यादा खुद के ख्यालों में रहती हो।वो जैसे ही कॉलेज गेट पार करती है… रुक जाती है।गार्ड के केबिन के पास, उसी कोने में… फिर वही रखा था।एक ...Read More
माफिया की मोहब्बत - 2
चैप्टर 2 — बेचैनीबारिश रात तक चलती रही।सावी के कमरे की खिड़की आधी खुली थी। पर्दे हवा के साथ रहे थे और मेज़ पर रखा वही सफेद गुलाब अब हल्का झुक चुका था। पंखुड़ियों पर जमी बूंदें चमक रही थीं… लेकिन सावी की आंखों में नींद नहीं थी।उसके दिमाग में बार-बार वही दृश्य घूम रहा था —तेज बाइक… चीख… और रेयांश का चेहरा।वो डरावना नहीं लगा था।अजीब तरह से… सुरक्षित लगा था।सावी ने खुद को झटका —“पागल हो क्या… किसी अनजान लड़के को जानती भी नहीं।”लेकिन सवाल पीछा नहीं छोड़ रहे थे।उसे बचाने कौन आया?हमलावर कौन थे?और उसे देखकर ...Read More
माफिया की मोहब्बत - 3
चैप्टर 3 — शिकायतक्लासरूम में सन्नाटा ठहरा हुआ था।रेयांश दरवाज़े पर खड़ा था। उसकी निगाहें सीधी सावी पर टिकी अभी मेरे साथ चलना होगा।”सावी का दिल जोर से धड़क रहा था, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर डर नहीं… सख़्ती थी।वो धीरे से खड़ी हुई।“मैं अनजान लोगों के साथ क्यों जाऊँ?” उसकी आवाज़ साफ और ठंडी थी।“तुम कौन हो?”पूरी क्लास सांस रोके देख रही थी।रेयांश कुछ पल उसे देखता रहा। जैसे वो बहुत कुछ कहना चाहता हो… मगर कह नहीं सकता।अथर्व आगे बढ़ा।“सुनाई नहीं दिया? वो नहीं जाएगी।”रेयांश की नजर अब अथर्व पर गई।दोनों के बीच हवा भारी हो ...Read More
माफिया की मोहब्बत - 4
आज मेडिकल कॉलेज की छुट्टी थी।सुबह से ही सावी को अजीब सा सुकून महसूस हो रहा था। कई दिनों ऐसा दिन आया था जब न क्लास थी, न प्रैक्टिकल, न अचानक लग जाने वाली टेस्ट की टेंशन। उसने बाल खुला छोड़ दिए, हल्का सा कुर्ता पहना और बालकनी में खड़ी होकर धूप को चेहरे पर गिरने दिया।फोन वाइब्रेट हुआ।अथर्व।“फ्री है?” उसने कॉल उठाते ही पूछा।“आज तो पूरी तरह,” सावी मुस्कुराई।“तो तैयार हो जा। दोपहर में निकल रहे हैं।”“कहाँ?”“सरप्राइज़।”“अथर्व…” सावी ने शक भरी आवाज में कहा।“टेंशन मत ले। बस आज कुछ देर के लिए सब भूल जा।”सावी ने हामी भर ...Read More
माफिया की मोहब्बत - 5
चैप्टर 5 — अपहरणकैफ़े के बाहर शाम उतरने लगी थी।कांच की दीवारों पर हल्की नारंगी रोशनी पड़ रही थी अंदर का सुकून भरा माहौल अब भी वैसा ही था — जैसे दुनिया में कुछ गलत हो ही नहीं सकता।सावी पानी का ग्लास हाथ में पकड़े चुप बैठी थी।अथर्व बिल पे करने काउंटर की तरफ गया हुआ था।उसके दिमाग में अभी भी वही पल घूम रहा था —घुटनों पर बैठा अथर्व… कांपती आवाज… सच्ची आँखें।दिल भारी था।वो उठी और बाहर के दरवाज़े के पास चली गई। उसे थोड़ी हवा चाहिए थी।दरवाज़ा खोलते ही हल्की ठंडी हवा चेहरे से टकराई। सड़क ...Read More